Scheme

दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना

गरीबों की सुढृृढ आधारभूत बुनियादी समस्याओं से शहरी गरीब परिवारों की गरीबी एवं एवं विषमताओं को लाभकारी स्वरोजगारों एवं कुशल पारिश्रमिक रोजगार के अवसरों तक उनकी पहुंच बनाकर उसकी आजीविका के स्थायी सुधार करता है। मिशन विभिन्न चरणों के शहरी निराश्रितों को सुनिश्चत एक आवश्यक सेवाओं के युक्त आश्रय उपलब्ध कराने का ध्यान केन्दित करेगा। इसके अतिरिक्त मिशन शहरी एवं विके्रमाओं की अजीविका हेतु उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने, संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने एवं सामाजिक सुरक्षा और कौशल उपलब्ध कराने पर भी ध्यान केन्द्रित करेगा ताकि पहुंच बढते हुये बाजार तक हो सके। मिशन का उद््देश्य शहरी गरीब महिलाओं केा स्वंय सहायता समूह के माध्यम एवं स्वतः रोजगारी के तहत अजीविका , स्वावलम्बन ,आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु शहरी गरीब परिवारों के उत्थान हेतु।

दीनदयाल अन्त्योदय योजना . राष्ट्रीय शहरी आजीवका मिशन : शहरी गरीब परिवारों हेतु पारिश्रमिक रोजगाार के अवसरों का उनकी पहुंच सुलभ बताकर उनकी आजीविका के स्थायी सुधार करने हेतु दीनदयाल अन्त्योदय योजना . राष्ट्रीय शहरी आजीवका मिशन का प्रारंभ भारत सरकार के आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय द्धारा 2012 में किया गया।

1 अप्रैल 2014 में उत्तराखण्ड़ राज्य में मिशन की शुरूआत की गइ्र्र । वर्तमान राज्य के 16 शहरों जिनमें राज्य के सभी 06 नगर निगमों ;देहरादून ,हरिद्धार ,रूड़की , काशीपुर, रूद्रपुर, हल्द्धावनी ,काठगोदामद्ध के अलावा पिथौरागढ़ ,अल्मोड़ा ,बागेश्वर ,चम्पावत , नैनीताल , रूद्रप्रयाग, चमोली , गोपेश्वर , टिहरी , पौडी, एवं उत्तरकाशी इत्यादि शहरों ;क्।ल्.छन्स्डद्ध में योजना संचालित की जा रही है। दीनदयाल अन्त्योदय योजना . राष्ट्रीय शहरी आजीवका मिशन क्।ल्.छन्स्ड के अंतर्गसत निम्नाकित के अनुरूप सेवाएं / सुविधाएं उपलब्ध है।

कौशल प्रशिक्षण तथा नियोजन के माध्यम से रोजगार

इस योजना के तहत बेरोजगार शहरी गरीबों को बाजार की मोग के अनूरूप इलेक्ट्रोनिक्स ,इलेक्ट्रीकल्स, सिंक्योरटी , फेब्र्रीकेशन ,फूड़ , प्रोसेसिगं ,टैक्सटाइल ,ब्यूटी कल्चरल एवं हेयर , डेªसिंग, गारमेट कढ़ाई, सिंलाई इत्यादि टेªडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान ंिकया जाता है। परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले लाभार्थियों न्यूनतम 50 प्रतिशत लाभार्थियों को प्लेसमेन्ट तथा/अथवा स्वरोजगार उद्यम हेतु जुड़ाव की सुविधा प्रदान की जाती हैं । सफल लाभार्थियों तथा उनके प्लेसमेंट के न्यूूनतम 6 माह तक टैकिंग की जाती है।

स्वरोजगार कार्यक्रम :

इस योजना के तहत व्यक्तिगत तथा समूह उद्यमों हेतु प्रोत्साहन तथा वित्तीय सहयोग हेतु बैेकों से जुडाव करवाया जाता है। शहारी गरीबों हेतु व्यक्तिगत उद्यम स्थापित करने हेतु 2लाख तक का ऋण 7 प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जाता है। इस हेतु किसी की गांरटी की आवश्यकता नहीं होती । षहरी गरीब महिला समूह अथवा मिशन द्धारा गठित यदि उद्यम करना चाहें तो अधिकतम रू.10 लाख तक का ऋण 4प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवाया जाता हैं। उपरोक्त ऋ़ण के सापेक्ष ब्याज अनुदान बैंकों को प्रदान किये जाते है। व्यक्तिगत तथा समूह उद्यमियों द्धारा ससमय भुगतार करने की स्थिति में 7 प्रतिशत की अनुदानित दर पर ऋण सुविधा करवाई जाती है। महिला समूहोंह हेतु 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट अनुदान ब्याज राशि बैंकों को निर्गम की जाती है।

सामाजिक संगठन एवं संस्थान विकास

इस घटक के तहत संसाधन संस्थाओं के माध्याम से स्वंय सहायता समूह गठित किए जाते है। इस समूहों को त्रिस्तरीय संगाठनिक सामूहिक संरचना (स्वयं सहासता समूह ,क्षेत्र स्तरीय संघ एवं नगर आजिविका केन्द्र ) में संगठित किया जाता है। इस योजना के तहत स्वंय सहायता समूह तथा क्षेत्र स्तरीय संघ को क्रमश; रू.10 हजार तथा 50 हजार की आवर्ती निधि का सहयोग प्रदान किया जाता है।ळ नगर स्तरीय संघ के मघ्यम से शहरी गरीब आजिविका केन्द्रों की स्थापना की जा सकती है। 10 लाख प्रति इकाई की दार से अनुदान की अनुमन्यता है।

यह केन्द्र शहरी गरीबों द्धारा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग तथा आपूर्ति के बीच रिक्त स्तान को भरने का कार्य करंगंे। इसके अलावा इन केन्द्रों द्धारा शहरी गरीबों हेतु सूचना तथा व्यवसाय सहायता सेवाएं प्रदान की जा सकती है। निकाय स्तर पर शहरी गरब महिलाओं को संगठित करके आजीविका हेतु प्रोत्साहन करना। शहरी पथ विक्रेताओं हेतु कार्यक्रम

शहरी क्षेत्र में फेरी व्यवसायियों का पंजीकरण नहीे होने के कारण वह असुरक्षित महसूस करते है । इसके अलावा उनके लिए कोई निर्धारित स्थान नहीं होने होने की वजह से उन्हं अपना व्यवसाय करने में भारी परेशानीयां होती हैं इस योजना के तहत फेरी के लिए सुरक्षित व्यवसाय करने हेतु फेरी स्थल चिन्हित किये जाने हेतु नगर स्तरीय फेरी व्यवसाय सर्वेक्षण कराया जाता है। इसके आधार पर फेरी व्यवयसयियों को निम्नांकित सुविधाएं प्रदान की जाती है।

1 नगर निकायों द्धारा फेरी व्यवसायियों को पहचान पत्र जारी करना।
2 नगरीय फेरी व्यवसाय योजना का विकास तथा फेरी बाजारों का विकास ।।
3 फेरी व्यवसायियों का आधारभूत बचत बैंकों जमा खाता खोलकर बैंकों से जुड़वा ।।
4 कार्य शील पूंजी आवश्यकता हेतु बैंकों से जुड़ावा।।
5 उकौशल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा समन्वयन।।

शहरी निराश्रितों हेतु आश्रय योजना रैन बसेरा इस योजना के अंतर्गत शहरों में प्रति 1 लाख शहरी जनसंख्या पर तथा जिला मुख्यालयों में स्थायी सामुदायिक आवासों यानि रैन बसेरों का निर्माण किया जाता है। प्रत्येक रैन बसरों में 50 से 100 व्यक्तियों के निवास की सुविधा होती है। इसके अतिरिक्त किचन,पानी, शौचालय , बिजली, मनोरंजन जैसी समस्त अवस्थापना सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई जाती है। यहां रहने वालों में से 10 प्रतिशत ( वृृद्ध,निशक्त,दिव्यगों, अथवा विधवाओं हेतु )को मुफ्त योजना व अन्य सुविधएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। इन रैन बसैरों के सदंर्भ में निम्नाकिंत तथ्य . अवस्थाना सुुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई करवाई जाती है। यहाँ रहने वालों में से 10 प्रतिशत (वृृद्ध ,दिव्यागों अथवा विधवाओं हेतु) कों मुफ्त भोजन व अन्य सुविधाओं उपलब्ध करवाई जाती है। इन रैन बसेरों के सदर्भ में निम्नाकिंत तथ्य.।

1 प्रति व्यक्ति न्यूनतम 5 वर्गमी. अथवा 50 वर्ग फिट की उपलब्धता सामाजिक सुरक्षा तथा अनुमन्यताओं हेतु जुड़ाव। 2 निर्माण लागत 90;10 के अनुपात मे भारत सरकार से प्राप्त होगी। संचालन एवं रख रखाव लागत 90;10 की अनुपात में भारत सरकार में 05 वर्ष हेतु प्राप्त होगी।

क्षमता विकास एवं प्रशिक्षण

पं. दिनदयाल अंत्योदय योजना . राष्ट्रीय शहरी आजीवका मिशन ;क्।ल्.छन्स्डद्ध के बेहतर कार्यान्तयन एवं सुचारू संचालन हेतु राज्य स्तर पर एक प्रोग्राम मैनेजमेन्ट युनिट का गठन किया गया है। जिसमें दों राज्य मिशन मैनेजरों की नियुक्ति की गई है। इसकें अनिरिक्त राज्य के सभी 16 मिशन शहरों में मिशन कार्यान्वयन हेतु सिटी मिशन मैनेजमेन्ट युनिटों की स्थाापना की गई है। इसमें से प्रत्येक में सिटी मिशन मैनेजरों , सामाजिक संगठनकर्ताओं की नियुक्त् की गई है। 1 .राज्य नगरीय विकाय अभिकरण को राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के कार्यन्वयन हेतु नोडल एजेन्सी घोषिम किया जा चुका है।।

2 .राज्य एवं सिटी मिशन मैनेजमेन्ट यूनिटों हेतु प्रशिक्षण एवं अन्य क्षमता अभिवृृद्धि सहयोग, जिस हेतु प्रति सदस्य रू.7500 की अनुमन्यता ।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी

सबके लिए आवास (शहरी) – 2022

विजनः “ राष्ट्र की स्वतंत्रा के 75 वर्ष पूरे होने तक प्रत्येक परिवार के पास जल कनेक्शन, शौचालय सुविधाओं , विधुत आपूर्ति / सुविधाओं के साथ पक्का आवास”

परिकल्पनाः वर्ष 2022 तक सभी के लिए आवास

मिशनः उक्त की उद्वेश्य की प्राप्ति हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना – 2022 सबके लिए आवास (शहरी) की शुरू किया गया
कार्यान्वयन रणनीतिः निम्न कार्यक्रम विकल्प के माध्यम से स्लमवासियों तथा शहरी गरीबों की आवासीय आवश्यकता को पूरा करना
भूमि का संसाधन के रूप में उपयोग करते हुये निजी प्रवर्तको की भागीदारी से स्लमवासियों का पुनर्वास
ऋ्रण से जुडी ब्याज सब्सिडी के माध्यम से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास प्रोत्साहन
सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों के साथ भागीदारी में किफायती आवास
लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण /बठोतरी के लिए सब्सिडी
उद्देश्य: मलिन बस्तियों सहित शहर मे निवासरत शहरी गरीबों/आवास विहीन पारिवारों की आवासीय आवश्यकता कोे पूर्ण करना।

मिशन अवधि: 25 जून 2015 – 31 मार्च 2022

कवरेज: जनगणना 2011 के अनुसार सभी सांविधिक कस्बे, अधिसूचित आयोजना/बाद में अधिसूचित कस्बे

लक्षित परिवार श्रेणीं:
परिवार श्रेणी वार्षिक पारिवारिक आय अनुमन्य कार्पेट एरिया
म् 3 लाख 30 वर्ग.मी.
स्प्ळ 3-6 लाख तक 60 वर्ग.मी.
डप्ळ.1 6-12 लाख तक 90 वर्ग.मी.
डप्ळ.2 12-18 लाख तक 110 वर्ग.मी.
ऽ परिवार से तात्पर्य में पति, पत्नी, अविवाहित पुत्र/पुत्रियां, जिनके अथवा परिवार के किसी सदस्य के नाम सम्पूर्ण भारत वर्ष में अपना पक्का आवास न हो।
ऽ वयस्क सदस्य जिसकी स्वयं की आय हो (किसी भी वैवाहिक स्थिति का) को पृथक परिवार समझा जायेगा।
ऽ वैवाहिक जोडे में पति/ पत्नी अथवा दोनो को, योजना में एक आवास हेतु आच्छादित किया जा सकता है, परन्तु उनके नाम सम्पूर्ण भारत में कोई पक्का आवास न हो, पात्रता आय के अनुरूप होगी।

लक्षित लाभार्थी:

* लाभार्थी परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित पुत्र/पुत्रियां शामिल होंगे।
* ऐसे लाभार्थी के परिवार के किसी सदस्य के नाम सम्पूर्ण भारत वर्ष में अपना पक्का आवास न हो, वे योजनान्तर्गत सहायता प्राप्त कर सकते।
* एम0आई0जी0 श्रेणी में आय अर्जित करने वाले वयस्क सदस्य को जिसकी स्वयं की आय हो (वैवाहिक स्थिति पर ध्यान दिये बिना) लाभार्थी हो सकता।
* ई0डब्लू0एस0 श्रेणी के लाभार्थी सभी घटकांे में सहायता प्राप्त कर सकता।
* एल0आई0जी0 श्रेणी / एम0आई0जी0 श्रेणी का लाभार्थी ऋण आधारित योजना से सहायता प्राप्त कर सकता।

योजना के प्रमुख घटकः

प् ‘स्व-स्थाने’ मलिन बस्ती पुनर्विकास ;प्द.ेपजन ैसनउ त्मकमअमसवचउमदजद्ध प्ैत्
प्प् ऋण से जुडे अनुदान द्वारा किफायती आवास ;ब्तमकपज स्पदा ैनइेपकल ैबीमउमद्ध ब्स्ैै
प्प्प् भागीदारी में किफायती आवास ;।ििवतकंइसम भ्वनेपदह पद च्ंतजदमतेीपचद्ध ।भ्च्
प्ट लाभार्थी आधारित निर्माण ;ठमदमपिबपंतल स्मक ब्वदेजतनबजपवदद्ध ठस्ब्

घटक परिचयः

स्व-स्थाने’ मलिन बस्ती पुनर्विकासः
पात्र स्लम वासियों को आवास प्रदान करने के लिए निजी सहभागिता से ’’संसाधन के रुप में भूमि’’ का उपयोग करते हुए ’स्व-स्थाने मलिन बस्ती पुनर्विकास’ एक महत्वपूर्ण धटक है।
पात्र स्लमवासियों को औपचारिक शहरी प्रणाली में लाते हुए उनको आवास प्रदान करने के लिए स्लमों के अंतर्गत भूमि की क्षमता को बढ़ाना ।
भूमि का संसाधन के रुप में उपयोग कर निजी प्रवर्तकों/लोक प्राधिकरणों की भागीदारी से मलिन बस्ती पुनर्विकास।
निजी सहभागिता से ई0डब्ल्यू0एस0 श्रेणी हेतु सरकारी भूमि पर निर्मित प्रति आवास निर्माण हेतु रू0 1.00 लाख केन्द्रांश की अनुमन्यता।
ऋण से जुडे अनुदान द्वारा किफायती आवासः

* आवास विहीन पात्र परिवारों हेतु कम ब्याज दरों पर ऋण>
* अग्रिम ब्याज अनुदान राशि का भुगतान, ऋण ई0एम0आई0 कम>
* आवेदक उक्त तालिका के अनुसार आवास निर्माण /पुर्नखरीद/क्रय हेतु आवेदन करने के लिए निकटतम् बैंक एवम् नगर निकय कार्यालय से सम्पर्क कर सकते है।
* पूर्णतः केन्द्र पोषित तथा केन्द्रीय नोडल एजेसिंयों -हुडको एवं एन0एच0बी0 द्वारा संचालित।>
* राज्य सरकार तथा नगर निकाय की भूमिका सुगमकत्र्ता के रूप में।>

भागीदारी में किफायती आवासः

* ऐसे व्यक्ति जिनके पास आवास बनाने हेतु स्वामित्वाधीन भूमि न हो एवम् किराए पर निवासरत् हो उनके लिए आपूर्ति आधारित व्यवस्था के अंतर्गत भागीदारी में किफायती आवास घटक अंतर्गत आर्थिक रुप से कमजोर ई॰डब्लू॰एस॰ वर्ग के आवासों की व्यवस्था की जा सकती है।>
* निजी/ सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी से किफायती आवासों का निर्माण
* आवासीय परियोजना (न्यूनतम 250 आवास) मे न्यूनतम 35ः आवास ई0डब्लू0एस0 श्रेणीं के लिये आरक्षित होने अनिवार्य
* ई0डब्लू0एस0 श्रेणी हेतु इस प्रकार निर्मित प्रति आवास हेतु रू0 1.50 लाख केन्द्राश की अनुमन्यता।

लाभार्थी आधारित निर्माणः

* व्यक्तिगत आवास की अपेक्षा वाले ई॰डब्ल्यू॰एस॰ श्रेणी के व्यक्ति/परिवार जिनके पास ’जमीन के अधिकार’ हो उन्ही को इस घटक अंतर्गत लाभांवित किया जा सकता है।
* 30 वर्ग मी0 कार्पेट एरिया युक्त नवीन आवास के निर्माण हेतु रू0 1.50 लाख केन्द्रांश तथा रू0 0.50 लाख राज्यांश की अनुमन्यता। ;छमू ब्वदेजतनबजपवदद्ध
* 21 वर्ग मी0 से न्यूनतम कार्पेट एरिया वाले विद्यमान आवासो को 30 वर्ग मी0 कार्पेट एरिया तक वृद्धि की अनुमन्यता। न्यूनतम वृद्धि 9 वर्ग मी0 होनी अनिवार्य। वृद्धि हेतु अधिकतम रू0 1.50 लाख प्रति आवास केन्द्राश की अनुमन्यता। ;प्दबतमउमदजंस भ्वनेपदहद्ध>

प्रधानमंत्री आवास योजना: सबके लिए आवास (शहरी) कार्ययोजना – 2022 तकः एक नजर

1. आवास मांग सर्वेक्षण में कुल प्राप्त आवास माॅग – 19094 (भारत सरकार के एम0आई0एस0 र्पोटल में तकनीकी समस्या के कारण 19271 आवास माॅग प्रदर्शित कर रहा है।)
2. मलिन बस्ती से कुल आवास मांग – 11171 (58.5 प्रतिशत)
3. शहर अन्य भाग से कुल आवास मांग – 7923(41.5 प्रतिशत)
4. घटकवार कुल माॅग का विवरण – प्ैैत्.11171 दृ 58ण्5ःए ब्स्ैै.531 . 2ण्8ःए ।भ्च्.7147.37ण्4ःए ठस्ब्;छब्द्ध . 147 . 0ण्8ः ए ठस्ब्;म्द्ध दृ 98 . 0ण्5ः
5. प्रधानमंत्री आवास योजना: सबके लिए आवास (शहरी) कार्य योजना वित्तीय – सारांश
स्लम हेतु 170.274 करोड़
नान-स्लम हेतु 128.745 करोड़
कुल कार्ययोजना 299.019 करोड़
Year wise targets under different components

Note:

1. The total demand from other urban poor based is – 7923 (as per table 12 above)

The total demand from slum (Tenable and Untenable is 11345 (However it is showing as 11348 in MIS this is due to the

03 Numbers of duplicate entries which are not been deleted and we are also not in position to delete it). Thus the total demand under different components comes to around 19269. (In MIS it is 19271 as shown in table above the same is because of 03 duplicate entries)

स्वच्छ भारत मिशन

देहरादून उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी होने के साथ जिला मुख्यालय भी है। राज्य के 06 नगर निगमों में से सबसे अधिक जनसंख्या वाला निगम है। मसूरी, हरिद्वार एवं ऋशिकेष यहां से 30-50 किमी0 दूरी पर स्थित मुख्य अर्बन केन्द्र है।

‘‘स्वच्छ भारत मिषन के उदेद्ष्य
1. खुले में षौच का उन्मूलन
2. मैला ढोने की प्रथा का उन्मूलन
3. आधुनिक एवं वैज्ञानिक ठोस अपषिश्ट प्रबन्धन
4. सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ, साथ-सफाई के बार में जागरूकता करना
5. नगर निकायों हेतु क्षमता विकास
6. निजी श्रम की भागीदारी के लिए अनुकूल माहौल बनाना।

1-उक्त उदेद्ष्यों की पूर्ति में प्रथम उदेद्ष्य खुले में षौच का उन्मूलन हेतु नगर निगम, देहरादून निम्न योजना पर कार्य कर रहा है।
व व्यक्तिगत घरेलू षौचालय, अस्वास्थकर षौचालयों को पल्स/जल प्रवाहित षौचालयों में परिवर्तित किया जाना/टू पिट सिस्टम/सैप्टिक टैंक-सोकपिट/सीवर लाईन में संयोजन व सामुदायिक एवं सार्वजनिक षौचालय, मोबाइल टायलेट की व्यवस्था करना। व उक्त हेतु व्यक्तिगत घरेलू षौचालय निर्माण हेतु प्राप्त आवेदन 2554 में से 1547 आवेदन सत्यापित कर सभी लाभार्थियों को प्रथम/द्वितीय किस्त अवमुक्त की जा चुकी है,नगर निगम, देहरादून के वर्तमान में 60 वार्डो को ओ0डी0एफ0 घोशित कर दिया गया है ।

2-नगर निगम, देहरादून की नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन योजना के अन्तर्गत ग्राम- शीशमबाड़ा, परगना-पछवादूना, तहसील-विकास नगर, देहरादून में लगभग 500 मिट्रिक टन कूड़े हेतु प्रोसेसिंग प्लांट तैयार किया जा रहा है, जिससे निकट भविश्य में कूड़े से 10 मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना भी प्रस्तावित है।नगर निगम, देहरादून का शीशमबाड़ा में निर्माणधीन प्रोसेसिंग प्लांट देश का पहला कवर्ड प्लांट है। शीशमबाड़ा में प्लांट संचालित होने से देहरादून जिले के प्लांट के आस-पास के अन्य नगर निकायों एवं नगर पंचायतों के भी कूड़ा निस्तारण की समस्या समाप्त करने हेतु कार्ययोजना तैयार की गयी है।

3-समय समय पर विषेश सफाई अभियान चलाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक किया जाता है ।

4- स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत निकाय स्तर पर देहरादून नगर निगम द्वारा भूमिगत कूड़ेदान स्थापित किये गये है। स्रोत पर ही कूडा पृथकीकरण एवं निस्तारण हेतु पहल की गयी है साथ ही साथ कम्पोस्टिंग द्वारा जैविक कूडे का निस्तारण करने हेतु कार्ययोजना तैयार की गयी है।

5-नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत स्थित पार्को के सौन्दर्यकरण एवं कूड़े के उचित निस्तारण हेतु कम्पोस्टिंग हेतु विन्डोª कम्पोस्टिंग इकाईयों को लगाया गया है।